उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।।
मूल पाठ
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादनिराकार, ओङ्कारके मूल, तुरीय (तीनों गुणोंसे अतीत), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियोंसे परे, कैलासपति, विकराल, महाकालके भी काल, कृपालु, गुणोंके धाम, संसारसे परे आप परमेश्वरको मैं नमस्कार करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1011 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।।
English explanation
I worship the formless Shiva, the source of Om, the fourth state of consciousness, beyond speech, knowledge, and the senses, the Lord of the mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निराकारमोंकारमूलं | निराकार और ओंकार के मूल को | the formless one, the source of Om |
| तुरीयं | चेतना की चौथी अवस्था स्वरूप को | the one embodying the fourth state of consciousness |
| गिरा | वाणी से | beyond speech |
| ग्यान | ज्ञान से | beyond knowledge |
| गोतीतमीशं | इंद्रियों से परे प्रभु को | the Lord beyond the senses |
| गिरीशं | पर्वत के स्वामी शिव को | Shiva, Lord of the mountain |
2 करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।
English explanation
I bow to Shiva, fearsome, the death even of great Time, compassionate, a treasury of virtues, and beyond worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करालं | विकराल को | the fearsome one |
| महाकाल | महाकाल के भी | even of great Time |
| कालं | काल अथवा संहारक को | the death or destroyer |
| कृपालं | कृपालु को | the compassionate one |
| गुणागार | गुणों के भंडार को | the treasury of virtues |
| संसारपारं | संसार से परे को | the one beyond worldly existence |
| नतोऽहं | मैं नतमस्तक हूँ | I bow down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1011
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।