उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
मूल पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरींह। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशाके ईश्वर तथा सबके स्वामी श्रीशिवजी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूपमें स्थित (अर्थात् मायादिरहित), [मायिक] गुणोंसे रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाशरूप एवं आकाशको ही वस्त्ररूपमें धारण करनेवाले दिगम्बर [अथवा आकाशको भी आच्छादित करनेवाले] आपको मैं भजता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1011 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
English explanation
AI-generated interpretive draft: I bow to Lord Shiva, the sovereign Lord, who embodies liberation, is all-powerful and all-pervading, and is Brahman and the embodiment of the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नमामीशमीशान | मैं प्रभु ईशान शिव को प्रणाम करता हूँ | I bow to the Lord, Shiva, the sovereign ruler |
| निर्वाणरूपं | मोक्षस्वरूप को | to the embodiment of liberation |
| विंभुं | सर्वसमर्थ प्रभु को | to the all-powerful Lord |
| ब्यापकं | सर्वव्यापक को | to the all-pervading one |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म को | to Brahman, ultimate reality |
| वेदस्वरूपं | वेदों के स्वरूप को | to the embodiment of the Vedas |
2 निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरींह। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।
English explanation
I worship Shiva, one's own true essence, beyond qualities and distinctions, free of desire, the expanse of consciousness, dwelling in space.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निजं | अपने निज स्वरूप को | one's own true essence |
| निर्गुणं | गुणों से रहित को | the one beyond qualities |
| निर्विकल्पं | भेद और विकल्प से रहित को | the one free of distinctions and alternatives |
| निरींह | इच्छारहित को | the desireless one |
| चिदाकाशमाकाशवासं | चेतन आकाशस्वरूप, आकाशवासी को | the expanse of consciousness, dwelling in space |
| भजेऽहं | मैं भजता हूँ | I worship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1011
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।