उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।।
मूल पाठ
दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।।
तनु पोषक नारि नरा सगरे। परनिंदक जे जग मो बगरे।।5।।
स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रियोंका दमन, दान, दया और समझदारी किसीमें नहीं रही। मूर्खता और दूसरोंको ठगना यह बहुत अधिक बढ़ गया। स्त्री-पुरुष सभी शरीरके ही पालन-पोषणमें लगे रहते हैं। जो परायी निन्दा करनेवाले हैं, जगत्में वे ही फैले हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1005 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।।
English explanation
There is no restraint of the senses, charity, compassion, or sound understanding; dullness and deceit toward others are exceedingly prevalent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| दान | दान | charity; giving |
| दया | करुणा | compassion |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| जानपनी | समझदारी; विवेक | sound understanding; discernment |
| जड़ता | बुद्धि की जड़ता | mental dullness |
| परबंचनताति | दूसरों को ठगने की अत्यधिक प्रवृत्ति | extreme deceit toward others |
| घनी | बहुत अधिक; प्रबल | dense; prevalent |
2 तनु पोषक नारि नरा सगरे। परनिंदक जे जग मो बगरे।।5।।
English explanation
All women and men are occupied with nourishing the body alone; those spread throughout the world slander others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर | body |
| पोषक | पोषण करने वाले | those who nourish |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नरा | पुरुष | men |
| सगरे | सभी | all |
| परनिंदक | दूसरों की निंदा करने वाले | slanderers of others |
| जे | जो | who; those who |
| जग | संसार | the world |
| मो | में | in |
| बगरे | फैले हुए हैं | are spread throughout |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1005
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।