उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।।
मूल पाठ
इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।।
सब लोग बियोग बिसोक हुए। बरनाश्रम धर्म अचार गए।।4।।
स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
भावार्थ
मूल पाठ के बादईष्र्या (डाह), कड़ुवे वचन और लालच भरपूर हो रहे हैं, समता चली गयी। सब लोग वियोग और विशेष शोकसे भरे पड़े हैं। वर्णाश्रम-धर्मके आचरण नष्ट हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1004 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।।
English explanation
Envy, harsh speech, and greed are pervasive; even-mindedness has disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इरिषा | ईर्ष्या | envy |
| परुषाच्छर | कठोर वचन | harsh words |
| लोलुपता | लोभ; लालच | greed; covetousness |
| भरि | भरकर | filling |
| पूरि | पूरी तरह | completely |
| रही | व्याप्त है | remains pervasive |
| समता | समभाव | even-mindedness |
| बिगता | चली गई; लुप्त | departed; vanished |
2 सब लोग बियोग बिसोक हुए। बरनाश्रम धर्म अचार गए।।4।।
English explanation
All people have become afflicted by separation and sorrow; the duties and practices of the social orders and stages of life have disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
| बियोग | वियोग से ग्रस्त | afflicted by separation |
| बिसोक | शोक से ग्रस्त | afflicted by sorrow |
| हुए | हो गए | have become |
| बरनाश्रम | वर्णों और आश्रमों के | of social orders and life stages |
| धर्म | कर्तव्य; धर्म | prescribed duties |
| अचार | आचार; आचरण के नियम | practices; rules of conduct |
| गए | लुप्त हो गए | have disappeared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1004
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।