उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
कलिकाल बिहाल किए मनुजा। नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा।
मूल पाठ
कलिकाल बिहाल किए मनुजा। नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा।
नहिं तोष बिचार न सीतलता। सब जाति कुजाति भए मगता।।3।।
स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
भावार्थ
मूल पाठ के बादकलिकालने मनुष्यको बेहाल (अस्त-व्यस्त) कर डाला। कोई बहिन-बेटीका भी विचार नहीं करता। [लोगोंमें] न सन्तोष है, न विवेक है और न शीतलता है। जाति, कुजाति सभी लोग भीख माँगनेवाले हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1004 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कलिकाल बिहाल किए मनुजा। नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा।
English explanation
The age of Kali has made people wretched. No one respects the familial boundaries owed to a younger sister or daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिकाल | कलियुग का समय | the age of Kali |
| बिहाल | बेहाल; व्याकुल | wretched; distraught |
| किए | कर दिया है | has made |
| मनुजा | मनुष्यों को | human beings |
| नहिं | नहीं | not |
| मानत | मानता; मर्यादा रखता | acknowledges; respects boundaries |
| क्वौ | कोई | anyone |
| अनुजा | छोटी बहन | younger sister |
| तनुजा | बेटी | daughter |
2 नहिं तोष बिचार न सीतलता। सब जाति कुजाति भए मगता।।3।।
English explanation
There is no contentment, discernment, or calm. People of every caste, whether regarded as high or low in social status, have become beggars.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | no |
| तोष | संतोष | contentment |
| बिचार | विचार; विवेक | reflection; discernment |
| न | नहीं | no |
| सीतलता | शांति; मन की शीतलता | calm; tranquility |
| सब | सभी | all |
| जाति | जातियों के लोग | people of castes |
| कुजाति | निम्न मानी गई जातियों के लोग | people of castes regarded as low |
| भए | हो गए | have become |
| मगता | याचक; माँगने वाले | beggars; supplicants |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1004
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।