उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हानि कि जग एहि सम किछु भाई। भजिअ न रामहि नर तनु पाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भाई! जगत्में क्या इसके समान दूसरी भी कोई हानि है कि मनुष्यका शरीर पाकर भी श्रीरामजीका भजन न किया जाय? चुगलखोरीके समान क्या कोई दूसरा पाप है? और हे गरुडज़ी! दयाके समान क्या कोई दूसरा धर्म है?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1019 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हानि कि जग एहि सम किछु भाई। भजिअ न रामहि नर तनु पाई।।
अघ कि पिसुनता सम कछु आना। धर्म कि दया सरिस हरिजाना।।
स्रोत अभिलेख 7.112 · पुस्तक पृ. 1018, 1019
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हानि कि जग एहि सम किछु भाई। भजिअ न रामहि नर तनु पाई।।
English explanation
Brother, is there any loss in the world like failing to worship Rama after obtaining a human body?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हानि | हानि | loss |
| कि | क्या | is there |
| जग | संसार में | in the world |
| एहि | इस के | this |
| सम | समान | like |
| किछु | कोई | any |
| भाई | हे भाई | brother |
| भजिअ | भजन किया जाए | worship |
| न | न | not |
| रामहि | भगवान राम को | Lord Rama |
| नर | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| पाई | पाकर | having obtained |
2 अघ कि पिसुनता सम कछु आना। धर्म कि दया सरिस हरिजाना।।
English explanation
Is there any other sin like malicious tale-bearing? O devotee of Hari, is there any virtue equal to compassion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अघ | पाप | sin |
| कि | क्या | is there |
| पिसुनता | चुगली और दुर्भावनापूर्ण निंदा | malicious tale-bearing |
| सम | समान | like |
| कछु | कोई | any |
| आना | दूसरा | other |
| धर्म | धर्म | virtue |
| कि | क्या | is there |
| दया | करुणा | compassion |
| सरिस | समान | equal to |
| हरिजाना | हे हरि के भक्त | O devotee of Hari |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1019
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1018, 1019
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।