उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पावन जस कि पुन्य बिनु होई। बिनु अघ अजस कि पावइ कोई।।
मूल पाठ
पावन जस कि पुन्य बिनु होई। बिनु अघ अजस कि पावइ कोई।।
लाभु कि किछु हरि भगति समाना। जेहि गावहिं श्रुति संत पुराना।।
स्रोत अभिलेख 7.112 · पुस्तक पृ. 1018, 1019
भावार्थ
मूल पाठ के बादबिना पुण्यके क्या पवित्र यश [प्राप्त] हो सकता है? बिना पापके भी क्या कोई अपयश पा सकता है? जिसकी महिमा वेद, संत और पुराण गाते हैं उस हरि-भक्तिके समान क्या कोई दूसरा लाभ भी है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1019 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पावन जस कि पुन्य बिनु होई। बिनु अघ अजस कि पावइ कोई।।
English explanation
Can pure renown arise without merit? Does anyone incur disgrace without wrongdoing?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावन | पवित्र | pure |
| जस | यश | renown |
| कि | क्या | can |
| पुन्य | पुण्य | merit |
| बिनु | बिना | without |
| होई | होता है | arise |
| बिनु | बिना | without |
| अघ | पाप | wrongdoing |
| अजस | अपयश | disgrace |
| कि | क्या | does |
| पावइ | पाता है | incur |
| कोई | कोई | anyone |
2 लाभु कि किछु हरि भगति समाना। जेहि गावहिं श्रुति संत पुराना।।
English explanation
Is there any gain equal to devotion to Hari, which the Vedas, saints, and Puranas praise?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लाभु | लाभ | gain |
| कि | क्या | is there |
| किछु | कोई | any |
| हरि | भगवान हरि की | to Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| समाना | समान | equal |
| जेहि | जिसका | which |
| गावहिं | गुणगान करते हैं | praise |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संत | संत | saints |
| पुराना | पुराण | the Puranas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1019
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1018, 1019
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