उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भव कि परहिं परमात्मा बिंदक। सुखी कि होहिं कबहुँ हरिनिंदक।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरमात्माको जाननेवाले कहीं जन्म-मरण [के चक्कर] में पड़ सकते हैं? भगवान्की निन्दा करनेवाले कभी सुखी हो सकते हैं? नीति बिना जाने क्या राज्य रह सकता है? श्रीहरिके चरित्र वर्णन करनेपर क्या पाप रह सकते हैं?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1018 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भव कि परहिं परमात्मा बिंदक। सुखी कि होहिं कबहुँ हरिनिंदक।।
राजु कि रहइ नीति बिनु जानें। अघ कि रहहिं हरिचरित बखानें।।
स्रोत अभिलेख 7.112 · पुस्तक पृ. 1018, 1019
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भव कि परहिं परमात्मा बिंदक। सुखी कि होहिं कबहुँ हरिनिंदक।।
English explanation
Do knowers of the Supreme Self fall into worldly bondage? Are those who disparage Hari ever happy?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार-बंधन में | into worldly bondage |
| कि | क्या | do |
| परहिं | पड़ते हैं | fall |
| परमात्मा | परम आत्मा को | the Supreme Self |
| बिंदक | जानने वाले | knowers of |
| सुखी | सुखी | happy |
| कि | क्या | are |
| होहिं | होते हैं | become |
| कबहुँ | कभी | ever |
| हरिनिंदक | भगवान हरि की निंदा करने वाले | those who disparage Lord Hari |
2 राजु कि रहइ नीति बिनु जानें। अघ कि रहहिं हरिचरित बखानें।।
English explanation
Can a kingdom endure without knowledge of right governance? Do sins remain when Hari's deeds are recounted?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजु | राज्य | kingdom |
| कि | क्या | can |
| रहइ | टिकता है | endure |
| नीति | शासन की नीति | right governance |
| बिनु | बिना | without |
| जानें | जाने | knowing |
| अघ | पाप | sins |
| कि | क्या | do |
| रहहिं | बचे रहते हैं | remain |
| हरिचरित | हरि के चरित्र | Hari's deeds |
| बखानें | वर्णन करने पर | upon recounting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1018
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1018, 1019
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।