उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंस कि रह द्विज अनहित कीन्हें। कर्म कि होहिं स्वरूपहि चीन्हें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दब्राह्मणका बुरा करनेसे क्या वंश रह सकता है? स्वरूपकी पहिचान (आत्मज्ञान) होनेपर क्या [आसक्तिपूर्वक] कर्म हो सकते हैं? दुष्टोंके सङ्गसे क्या किसीके सुबुद्धि उत्पन्न हुई है? परस्त्रीगामी क्या उत्तम गति पा सकता है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1018 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंस कि रह द्विज अनहित कीन्हें। कर्म कि होहिं स्वरूपहि चीन्हें।।
काहू सुमति कि खल सँग जामी। सुभ गति पाव कि परत्रिय गामी।।
स्रोत अभिलेख 7.112 · पुस्तक पृ. 1018, 1019
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बंस कि रह द्विज अनहित कीन्हें। कर्म कि होहिं स्वरूपहि चीन्हें।।
English explanation
Can a lineage survive after harming a Brahmin? Do karmic bonds remain once one's true nature is recognized?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंस | वंश | lineage |
| कि | क्या | can |
| रह | बचा रहता है | survive |
| द्विज | ब्राह्मण का | a Brahmin's |
| अनहित | अहित | harm |
| कीन्हें | करने पर | upon doing |
| कर्म | कर्म के बंधन | karmic bonds |
| कि | क्या | do |
| होहिं | रहते हैं | remain |
| स्वरूपहि | अपने वास्तविक स्वरूप को | one's true nature |
| चीन्हें | पहचान लेने पर | upon recognizing |
2 काहू सुमति कि खल सँग जामी। सुभ गति पाव कि परत्रिय गामी।।
English explanation
Does sound judgment arise in anyone through evil company? Does one who pursues another's wife attain a blessed destiny?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काहू | किसी की | in anyone |
| सुमति | सद्बुद्धि | sound judgment |
| कि | क्या | does |
| खल | दुष्ट की | of the wicked |
| सँग | संगति में | in the company |
| जामी | जन्मी | arise |
| सुभ | शुभ | blessed |
| गति | गति | destiny |
| पाव | पाता है | attain |
| कि | क्या | does |
| परत्रिय | परायी स्त्री के पास | another's wife |
| गामी | जाने वाला | one who pursues |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1018
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1018, 1019
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।