उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबहुँ कि दुख सब कर हित ताकें। तेहि कि दरिद्र परस मनि जाकें।।
मूल पाठ
कबहुँ कि दुख सब कर हित ताकें। तेहि कि दरिद्र परस मनि जाकें।।
परद्रोही की होहिं निसंका। कामी पुनि कि रहहिं अकलंका।।
स्रोत अभिलेख 7.112 · पुस्तक पृ. 1018, 1019
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबका हित चाहनेसे क्या कभी दु:ख हो सकता है? जिसके पास पारसमणि है, उसके पास क्या दरिद्रता रह सकती है? दूसरेसे द्रोह करनेवाले क्या निर्भय हो सकते हैं और कामी क्या कलङ्करहित (बेदाग) रह सकते हैं?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1018 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कबहुँ कि दुख सब कर हित ताकें। तेहि कि दरिद्र परस मनि जाकें।।
English explanation
AI draft: Can one who seeks everyone's welfare ever suffer? Can one who possesses the philosopher's stone be poor?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या | can |
| दुख | दुःख | suffering |
| सब | सबका | everyone |
| कर | का | of |
| हित | भला | welfare |
| ताकें | चाहता है | seeks |
| तेहि | उसे | to that person |
| कि | क्या | can |
| दरिद्र | दरिद्रता | poverty |
| परस | पारस | philosopher's |
| मनि | मणि | stone |
| जाकें | जिसके पास | who possesses it |
2 परद्रोही की होहिं निसंका। कामी पुनि कि रहहिं अकलंका।।
English explanation
Can those who harm others be free of apprehension? And can the lustful remain unstained?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परद्रोही | दूसरों का अहित करने वाले | those who harm others |
| की | क्या | can |
| होहिं | हो सकते हैं | become |
| निसंका | शंकाहीन | free of apprehension |
| कामी | कामासक्त लोग | lustful people |
| पुनि | फिर | moreover |
| कि | क्या | can |
| रहहिं | रह सकते हैं | remain |
| अकलंका | कलंक रहित | unstained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1018
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1018, 1019
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।