उत्तरकाण्ड · दोहा 111 (ख) · दोहा
क्रोध कि द्वैतबुद्धि बिनु द्वैत कि बिनु अग्यान।
क्रोध कि द्वैतबुद्धि बिनु द्वैत कि बिनु अग्यान।
मायाबस परिछिन्न जड़ जीव कि ईस समान॥ १११ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ और शब्दार्थ
1क्रोध कि द्वैतबुद्धि बिनु द्वैत कि बिनु अग्यान।
क्या द्वैतबुद्धि के बिना क्रोध हो सकता है, और क्या अज्ञान के बिना द्वैत हो सकता है?
English explanation
Can anger arise without a sense of duality, and can duality exist without ignorance?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| क्रोध | क्रोध | anger |
| कि | क्या हो सकता है? | can there be? |
| द्वैतबुद्धि | भेद मानने वाली बुद्धि के | a perception of duality |
| बिनु | बिना | without |
| द्वैत | द्वैत; भेद की धारणा | duality; a sense of separation |
| कि | क्या हो सकता है? | can there be? |
| बिनु | बिना | without |
| अग्यान | अज्ञान के | ignorance |
2मायाबस परिछिन्न जड़ जीव कि ईस समान॥ १११ (ख)॥
क्या माया के वश में पड़ा, सीमित और अज्ञानयुक्त जीव ईश्वर के समान हो सकता है?
English explanation
Can an individual soul, subject to maya, limited, and without true understanding, be equal to God?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायाबस | माया के अधीन | subject to maya, the power of illusion |
| परिछिन्न | सीमित; परिच्छेद से बँधा | limited; circumscribed |
| जड़ | अज्ञानयुक्त; विवेकहीन | uncomprehending; lacking discernment |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा; जीव | the individual soul |
| कि | क्या हो सकता है? | can it be? |
| ईस | ईश्वर के | to God |
| समान | समान; बराबर | equal |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 111 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।