उत्तरकाण्ड · दोहा 111 (क) · दोहा
बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान।
बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान।
मैं अपने मन बैठ तब करउँ बिबिधि अनुमान॥ १११ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान।
मुनि बार-बार क्रोधपूर्वक ज्ञान का निरूपण करते हैं। (यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है।)
English explanation
The sage repeatedly expounds spiritual knowledge in anger. (This is an AI-generated draft interpretation.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारंबार | बार-बार | repeatedly |
| सकोप | क्रोध सहित | with anger |
| मुनि | मुनि; यहाँ लोमश ऋषि | the sage, here Lomasha |
| करइ | करते हैं | does; here, expounds |
| निरूपन | विवेचन; समझाना | exposition; explanation |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान का | of spiritual knowledge |
2मैं अपने मन बैठ तब करउँ बिबिधि अनुमान॥ १११ (क)॥
तब मैं बैठकर अपने मन में तरह-तरह के विचार करता हूँ।
English explanation
Then, sitting, I consider various questions within my own mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं; यहाँ काकभुशुण्डि | I, here Kakabhushundi |
| अपने | अपने ही | my own |
| मन | मन में | in my mind |
| बैठ | बैठकर | sitting |
| तब | तब; उस समय | then; at that time |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make; I consider |
| बिबिधि | विविध; तरह-तरह के | various; of different kinds |
| अनुमान | विचार; तर्क द्वारा निष्कर्ष | reflections; reasoned inferences |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 111 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।