उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरि बिषइक अस मोह बिहंगा। सपनेहुँ नहिं अग्यान प्रसंगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे गरुडज़ी! श्रीहरिके विषयमें मोहकी कल्पना भी ऐसी ही है, भगवान्में तो स्वप्रमें भी अज्ञानका प्रसंग (अवसर) नहीं है। किन्तु जो मायाके वश, मन्दबुद्धि और भाग्यहीन हैं और जिनके हृदयपर अनेकों प्रकारके परदे पड़े हैं,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 976 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरि बिषइक अस मोह बिहंगा। सपनेहुँ नहिं अग्यान प्रसंगा।।
मायाबस मतिमंद अभागी। हृदयँ जमनिका बहुबिधि लागी।।
स्रोत अभिलेख 7.73 · पुस्तक पृ. 976, 976
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हरि बिषइक अस मोह बिहंगा। सपनेहुँ नहिं अग्यान प्रसंगा।।
English explanation
O Garuda, such is people’s delusion concerning Hari; there is not even the slightest trace of ignorance in Hari himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| बिषइक | संबंध में | concerning |
| अस | ऐसा | such |
| मोह | मोह | delusion |
| बिहंगा | हे पक्षी गरुड़! | O Garuda! |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| नहिं | नहीं | not |
| अग्यान | अज्ञान का | of ignorance |
| प्रसंगा | प्रसंग या संबंध | any trace or involvement |
2 मायाबस मतिमंद अभागी। हृदयँ जमनिका बहुबिधि लागी।।
English explanation
The hearts of the unfortunate, dull-minded people under Maya’s sway are covered by veils of many kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायाबस | माया के वश में | under Maya’s sway |
| मतिमंद | मंद बुद्धि वाले | dull-minded |
| अभागी | अभागे लोग | unfortunate people |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| जमनिका | पर्दा | a veil |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| लागी | लगा हुआ है | is drawn over it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 976
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 976, 976
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।