उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ते सठ हठ बस संसय करहीं। निज अग्यान राम पर धरहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे मूर्ख हठके वश होकर सन्देह करते हैं और अपना अज्ञान श्रीरामजीपर आरोपित करते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 976 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ते सठ हठ बस संसय करहीं। निज अग्यान राम पर धरहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.73 · पुस्तक पृ. 976, 976
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ते सठ हठ बस संसय करहीं। निज अग्यान राम पर धरहीं।।
English explanation
Those fools, ruled by obstinacy, entertain doubts and attribute their own ignorance to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| सठ | मूर्ख | fools |
| हठ | हठ के | of obstinacy |
| बस | वश में | under the sway |
| संसय | संदेह | doubts |
| करहीं | करते हैं | entertain |
| निज | अपना | their own |
| अग्यान | अज्ञान | ignorance |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| पर | पर | to |
| धरहीं | आरोपित करते हैं | attribute |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 976
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 976, 976
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।