उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरइ सिष्य धन सोक न हरई। सो गुर घोर नरक महुँ परई।।
मूल पाठ
हरइ सिष्य धन सोक न हरई। सो गुर घोर नरक महुँ परई।।
मातु पिता बालकन्हि बोलाबहिं। उदर भरै सोइ धर्म सिखावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.99 · पुस्तक पृ. 1001, 1001
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो गुरु शिष्यका धन हरण करता है, पर शोक नहीं हरण करता, वह घोर नरकमें पड़ता है। माता-पिता बालकोंको बुलाकर वही धर्म सिखलाते हैं, जिससे पेट भरे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1001 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरइ सिष्य धन सोक न हरई। सो गुर घोर नरक महुँ परई।।
English explanation
A guru who takes away a disciple's wealth but does not remove the disciple's sorrow falls into a dreadful hell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरइ | हर लेता है | takes away |
| सिष्य | शिष्य का | the disciple's |
| धन | धन | wealth |
| सोक | शोक | sorrow |
| न | नहीं | not |
| हरई | दूर करता है | removes |
| सो | वह | that |
| गुर | गुरु | teacher |
| घोर | भयंकर | dreadful |
| नरक | नरक | hell |
| महुँ | में | in |
| परई | पड़ता है | falls |
2 मातु पिता बालकन्हि बोलाबहिं। उदर भरै सोइ धर्म सिखावहिं।।
English explanation
Parents call their children and teach them only that dharma which fills the stomach.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता | mother |
| पिता | पिता | father |
| बालकन्हि | बच्चों को | the children |
| बोलाबहिं | बुलाते हैं | call |
| उदर | पेट | the stomach |
| भरै | भरता है | fills |
| सोइ | वही | that alone |
| धर्म | धर्म या आचरण | dharma or prescribed conduct |
| सिखावहिं | सिखाते हैं | teach |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1001
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1001, 1001
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