उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सौभागिनीं बिभूषन हीना। बिधवन्ह के सिंगार नबीना।।
मूल पाठ
सौभागिनीं बिभूषन हीना। बिधवन्ह के सिंगार नबीना।।
गुर सिष बधिर अंध का लेखा। एक न सुनइ एक नहिं देखा।।
स्रोत अभिलेख 7.99 · पुस्तक पृ. 1001, 1001
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुहागिनी स्त्रियाँ तो आभूषणोंसे रहित होती हैं, पर विधवाओंके नित्य नये शृङ्गार होते हैं। शिष्य और गुरुमें बहरे और अंधेका-सा हिसाब होता है। एक (शिष्य) गुरुके उपदेशको सुनता नहीं, एक (गुरु) देखता नहीं (उसे ज्ञानदृष्टि प्राप्त नहीं है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1001 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सौभागिनीं बिभूषन हीना। बिधवन्ह के सिंगार नबीना।।
English explanation
Women whose husbands are alive lack ornaments, while widows wear fresh adornments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौभागिनीं | पति के जीवित रहते विवाहित स्त्रियाँ | married women whose husbands are alive |
| बिभूषन | आभूषणों से | of ornaments |
| हीना | रहित | devoid |
| बिधवन्ह | विधवाओं | widows |
| के | के | of |
| सिंगार | शृंगार | adornments |
| नबीना | नए-नए | fresh and new |
2 गुर सिष बधिर अंध का लेखा। एक न सुनइ एक नहिं देखा।।
English explanation
Guru and disciple are like the deaf and the blind: one—the disciple—does not listen, and the other—the guru—does not see.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | the teacher |
| सिष | शिष्य | the disciple |
| बधिर | बहरे | the deaf |
| अंध | अंधे | the blind |
| का | के | of |
| लेखा | समान | like |
| एक | एक, शिष्य | one, the disciple |
| न | नहीं | not |
| सुनइ | सुनता है | listens |
| एक | दूसरा, गुरु | the other, the teacher |
| नहिं | नहीं | not |
| देखा | देखता है | sees |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1001
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1001, 1001
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