उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब नर काम लोभ रत क्रोधी। देव बिप्र श्रुति संत बिरोधी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसभी पुरुष काम और लोभमें तत्पर और क्रोधी होते हैं। देवता, ब्राह्मण, वेद और संतोंके विरोधी होते हैं। अभागिनी स्त्रियाँ गुणोंके धाम सुन्दर पतिको छोड़कर परपुरुषका सेवन करती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1001 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब नर काम लोभ रत क्रोधी। देव बिप्र श्रुति संत बिरोधी।।
गुन मंदिर सुंदर पति त्यागी। भजहिं नारि पर पुरुष अभागी।।
स्रोत अभिलेख 7.99 · पुस्तक पृ. 1001, 1001
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब नर काम लोभ रत क्रोधी। देव बिप्र श्रुति संत बिरोधी।।
English explanation
All men are absorbed in lust and greed, prone to anger, and opposed to the gods, Brahmins, the Vedas, and saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| नर | पुरुष | men |
| काम | कामवासना में | in lust |
| लोभ | लोभ में | in greed |
| रत | लिप्त | absorbed |
| क्रोधी | क्रोध करने वाले | prone to anger |
| देव | देवताओं के | of the gods |
| बिप्र | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| श्रुति | वेदों के | of the Vedas |
| संत | संतों के | of saints |
| बिरोधी | विरोधी | opponents |
2 गुन मंदिर सुंदर पति त्यागी। भजहिं नारि पर पुरुष अभागी।।
English explanation
Unfortunate women abandon their handsome husbands, who are abodes of virtue, and consort with other men.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुन | गुणों का | of virtues |
| मंदिर | भंडार | an abode |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| पति | पति को | their husbands |
| त्यागी | त्यागकर | having abandoned |
| भजहिं | संबंध रखती हैं | consort with |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| पर | अन्य | other |
| पुरुष | पुरुषों से | men |
| अभागी | अभागी | unfortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1001
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1001, 1001
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।