उत्तरकाण्ड · दोहा 99 (क) · दोहा
ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर कहहिं न दूसरि बात।
ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर कहहिं न दूसरि बात।
कौड़ी लागि लोभ बस करहिं बिप्र गुर घात॥ ९९ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.99 · पुस्तक पृ. 1001, 1001
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर कहहिं न दूसरि बात।
एआई प्रारूप: स्त्री और पुरुष ब्रह्मज्ञान के सिवा कोई दूसरी बात नहीं कहते।
English explanation
AI draft: Women and men speak of nothing other than knowledge of Brahman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम तत्त्व | Brahman, the ultimate reality |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिनु | के सिवा | other than |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| कहहिं | कहते हैं | say; speak of |
| न | नहीं | not |
| दूसरि | दूसरी | any other |
| बात | बात | topic; matter |
2 कौड़ी लागि लोभ बस करहिं बिप्र गुर घात॥ ९९ (क)॥
लोभ के वश होकर वे एक कौड़ी के लिए ब्राह्मण और गुरु तक की हत्या करते हैं।
English explanation
Driven by greed, they kill even Brahmins and teachers for a mere cowrie.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौड़ी | कौड़ी; अत्यल्प धन | a cowrie; a paltry sum |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| लोभ | लालच | greed |
| बस | के वश में | under the sway of |
| करहिं | करते हैं | commit; carry out |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| गुर | गुरु | teachers; spiritual preceptors |
| घात | हत्या | killing |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 99 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.99
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1001, 1001
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।