उत्तरकाण्ड · सोरठा 98 (ख) · सोरठा
जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ।
जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ।
मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ॥ ९८ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.98 · पुस्तक पृ. 1000, 1000
भावार्थ और शब्दार्थ
1जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ।
जिनका आचरण दूसरों का अहित करने वाला है, उन्हीं का गौरव होता है और वे ही सम्माननीय माने जाते हैं।
English explanation
Those whose conduct harms others are accorded prestige and are themselves regarded as worthy of respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिनका | whose |
| अपकारी | दूसरों का अहित करने वाला | harmful to others |
| चार | आचरण | conduct |
| तिन्ह | उनका | their |
| कर | का | of; possessive marker |
| गौरव | गौरव; प्रतिष्ठा | prestige; honor |
| मान्य | सम्माननीय माने जाने वाले | regarded as worthy of respect |
| तेइ | वे ही | those very people |
2 मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ॥ ९८ (ख)॥
जो मन, कर्म और वचन से झूठे हैं, वे ही कलिकाल में अच्छे वक्ता माने जाते हैं।
English explanation
Those who are false in thought, deed, and speech are the very ones regarded as accomplished speakers in the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से; विचार में | in mind; in thought |
| क्रम | कर्म से; आचरण में | in deed; in conduct |
| बचन | वचन से; बोलने में | in speech |
| लबार | झूठे; मिथ्याभाषी | false; liars |
| तेइ | वे ही | those very people |
| बकता | वक्ता; बोलने में कुशल माने जाने वाले | speakers; regarded as skilled orators |
| कलिकाल | कलियुग के समय | the age of Kali |
| महुँ | में | in |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker “ख” |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 98 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.98
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1000, 1000
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।