उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना।।
मूल पाठ
सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना।।
एहि बिधि जीव चराचर जेते। त्रिजग देव नर असुर समेते।।
स्रोत अभिलेख 7.87 · पुस्तक पृ. 989, 989
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह पुत्र पिताको प्राणोंके समान प्रिय होता है, यद्यपि (चाहे) वह सब प्रकारसे अज्ञान (मूर्ख) ही हो। इस प्रकार तिर्यक् (पशु-पक्षी), देव, मनुष्य और असुरोंसमेत जितने भी चेतन और जड जीव हैं,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 989 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना।।
English explanation
That son is as dear to his father as his own life, even though he may be unknowing in every respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| सुत | पुत्र | son |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पितु | पिता को | to the father |
| प्रान | प्राण | his own life |
| समाना | के समान | as much as |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| सो | वह | he |
| सब | सब | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| अयाना | अनजान; ज्ञानहीन | unknowing; ignorant |
2 एहि बिधि जीव चराचर जेते। त्रिजग देव नर असुर समेते।।
English explanation
Likewise, all moving and unmoving beings in the three worlds, including gods, humans, and demons—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | in manner |
| जीव | जीव | living beings |
| चराचर | चलने वाले और स्थिर | moving and unmoving |
| जेते | जितने भी | all that exist |
| त्रिजग | तीनों लोकों में | in the three worlds |
| देव | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| असुर | असुर | demons |
| समेते | सहित | including |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 989
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 989, 989
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