उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि वह मणि जगत्में प्रकट (प्रत्यक्ष) है, पर बिना श्रीरामजीकी कृपाके उसे कोई पा नहीं सकता। उसके पानेके उपाय भी सुगम ही हैं पर अभागे मनुष्य उन्हें ठुकरा देते हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1031 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई।।
सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटमेरे।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई।।
English explanation
Although that jewel is manifest in the world, no one obtains it without Rama's grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| मनि | मणि | jewel |
| जदपि | यद्यपि | although |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| जग | संसार में | in the world |
| अहई | है | is |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपा | कृपा | grace |
| बिनु | के बिना | without |
| नहिं | नहीं | not |
| कोउ | कोई | anyone |
| लहई | पाता है | obtains |
2 सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटमेरे।।
English explanation
The means of obtaining it are easy, yet unfortunate people wander aimlessly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुगम | सरल | easy |
| उपाय | उपाय | means |
| पाइबे | पाने | obtaining |
| केरे | के | for |
| नर | मनुष्य | people |
| हतभाग्य | अभागे | unfortunate |
| देहिं | करते हैं | make |
| भटमेरे | व्यर्थ के भटकाव | aimless wanderings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1031
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।