उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामभक्तिरूपी मणि जिसके हृदयमें बसती है, उसे स्वप्रमें भी लेशमात्र दु:ख नहीं होता। जगत्में वे ही मनुष्य चतुरोंके शिरोमणि हैं जो उस भक्तिरूपी मणिके लिये भलीभाँति यत्न करते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1031 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें।।
चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें।।
English explanation
One in whose heart the jewel of devotion to Rama dwells has not the slightest sorrow, even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मनि | मणि | jewel |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बस | बसती है | dwells |
| जाकें | जिसके | whose |
| दुख | दुःख | sorrow |
| लवलेस | अत्यंत थोड़ा भी | even the slightest trace |
| न | नहीं | not |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| ताकें | उसको | to that person |
2 चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं।।
English explanation
Those who make earnest efforts for this jewel are the foremost among the wise in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चतुर | बुद्धिमानों में | among the wise |
| सिरोमनि | श्रेष्ठ | foremost |
| तेइ | वे ही | those very people |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| जे | जो | who |
| मनि | भक्ति रूपी मणि | jewel of devotion |
| लागि | के लिए | for |
| सुजतन | अच्छा प्रयत्न | earnest effort |
| कराहीं | करते हैं | make |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1031
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।