उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ सच्चिदानंद घन रामा। अज बिग्यान रूपो बल धामा।।
मूल पाठ
सोइ सच्चिदानंद घन रामा। अज बिग्यान रूपो बल धामा।।
ब्यापक ब्याप्य अखंड अनंता। अखिल अमोघसक्ति भगवंता।।
स्रोत अभिलेख 7.72 · पुस्तक पृ. 975, 975
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी वही सच्चिदानन्दघन हैं जो अजन्मा, विज्ञानस्वरूप, रूप और बलके धाम, सर्वव्यापक एवं व्याप्य (सर्वरूप), अखण्ड, अनन्त, सम्पूर्ण, अमोघशक्ति (जिसकी शक्ति कभी व्यर्थ नहीं होती) और छ: ऐश्वर्योंसे युक्त भगवान् हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 975 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ सच्चिदानंद घन रामा। अज बिग्यान रूपो बल धामा।।
English explanation
That same Rama is the fullness of being, consciousness, and bliss; he is unborn, knowledge itself, and the abode of strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही प्रभु | that same Lord |
| सच्चिदानंद | सत्, चेतना और आनंद | being, consciousness, and bliss |
| घन | सघन पूर्ण स्वरूप | condensed fullness; embodiment |
| रामा | भगवान राम | Rama, the Lord |
| अज | अजन्मा | unborn |
| बिग्यान | विशुद्ध ज्ञान; अनुभूत ज्ञान | pure, realized knowledge |
| रूपो | स्वरूप | embodiment |
| बल | शक्ति; बल | strength; power |
| धामा | धाम; भंडार | abode; repository |
2 ब्यापक ब्याप्य अखंड अनंता। अखिल अमोघसक्ति भगवंता।।
English explanation
He pervades all and is also all that is pervaded; he is indivisible, infinite, all-encompassing, and the Lord whose power never fails.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापक | सबमें व्याप्त होने वाले | all-pervading |
| ब्याप्य | जिसमें व्याप्ति हो; व्याप्त जगत का स्वरूप | the pervaded; all that is permeated |
| अखंड | अविभाजित | indivisible |
| अनंता | सीमारहित | infinite |
| अखिल | समस्त का स्वरूप | all-encompassing; the whole |
| अमोघसक्ति | जिनकी शक्ति कभी निष्फल नहीं होती | whose power is unfailing |
| भगवंता | भगवान; ऐश्वर्यसंपन्न प्रभु | the blessed, sovereign Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 975
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 975, 975
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।