उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो माया सब जगहि नचावा। जासु चरित लखि काहुँ न पावा।।
मूल पाठ
जो माया सब जगहि नचावा। जासु चरित लखि काहुँ न पावा।।
सोइ प्रभु भ्रू बिलास खगराजा। नाच नटी इव सहित समाजा।।
स्रोत अभिलेख 7.72 · पुस्तक पृ. 975, 975
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो माया सारे जगत्को नचाती है और जिसका चरित्र (करनी) किसीने नहीं लख पाया, हे खगराज गरुडज़ी! वही माया प्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी भ्रुकुटीके इशारेपर अपने समाज (परिवार) सहित नटीकी तरह नाचती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 975 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो माया सब जगहि नचावा। जासु चरित लखि काहुँ न पावा।।
English explanation
AI draft: The illusion-power that makes the whole world dance, whose workings no one has been able to comprehend—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| माया | माया; जगत को मोहने वाली शक्ति | Maya, the power of illusion |
| सब | समस्त | the whole |
| जगहि | जगत को | world (as object) |
| नचावा | नचाती है | makes dance |
| जासु | जिसकी | whose |
| चरित | लीला; कार्य-व्यापार | workings; play |
| लखि | समझ | comprehend |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| पावा | सका | was able to |
2 सोइ प्रभु भ्रू बिलास खगराजा। नाच नटी इव सहित समाजा।।
English explanation
O Garuda, king of birds, that very Maya dances like an actress, together with her entire troupe, at the Lord’s brow gesture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही माया | that very Maya |
| प्रभु | प्रभु के | of the Lord |
| भ्रू | भौंह | brow |
| बिलास | संकेत; हल्की चेष्टा | gesture; slight movement |
| खगराजा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| नाच | नाचती है | dances |
| नटी | नर्तकी; अभिनेत्री | dancer; actress |
| इव | की तरह | like |
| सहित | के साथ | together with |
| समाजा | अपना पूरा समूह | her entire troupe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 975
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 975, 975
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।