उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ भव तर कछु संसय नाहीं। नाम प्रताप प्रगट कलि माहीं।।
मूल पाठ
सोइ भव तर कछु संसय नाहीं। नाम प्रताप प्रगट कलि माहीं।।
कलि कर एक पुनीत प्रतापा। मानस पुन्य होहिं नहिं पापा।।
स्रोत अभिलेख 7.103 · पुस्तक पृ. 1005, 1006
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही भवसागरसे तर जाता है, इसमें कुछ भी सन्देह नहीं। नामका प्रताप कलियुगमें प्रत्यक्ष है। कलियुगका एक पवित्र प्रताप (महिमा) है कि मानसिक पुण्य तो होते हैं, पर [मानसिक] पाप नहीं होते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1006 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ भव तर कछु संसय नाहीं। नाम प्रताप प्रगट कलि माहीं।।
English explanation
That person crosses worldly existence; there is no doubt at all. The power of Rama’s name is manifest in the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
| भव | संसार-बंधन से | worldly existence and bondage |
| तर | पार होता है | crosses beyond |
| कछु | कोई भी | any at all |
| संसय | संदेह | doubt |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| नाम | राम के नाम का | of Rama’s name |
| प्रताप | प्रभाव और सामर्थ्य | power and efficacy |
| प्रगट | प्रकट है | is manifest |
| कलि | कलियुग | the age of Kali |
| माहीं | में | in |
2 कलि कर एक पुनीत प्रतापा। मानस पुन्य होहिं नहिं पापा।।
English explanation
One sanctifying feature of the age of Kali is that meritorious deeds performed mentally bear fruit, but sins committed only mentally do not.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलियुग | the age of Kali |
| कर | का | of |
| एक | एक | one |
| पुनीत | पवित्र | sanctifying |
| प्रतापा | प्रभाव | effect or special power |
| मानस | मन में किए हुए | performed mentally |
| पुन्य | पुण्य कर्म | meritorious deeds |
| होहिं | फलित होते हैं | bear fruit |
| नहिं | नहीं | not |
| पापा | पाप कर्म | sinful deeds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1006
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1005, 1006
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।