उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा।।
मूल पाठ
सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा।।
लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा। पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 7.67 · पुस्तक पृ. 970, 971
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंपातीसे सब कथा सुनकर पवनपुत्र हनुमान्जी जिस तरह अपार समुद्रको लाँघ गये, फिर हनुमान्जीने जैसे लङ्कामें प्रवेश किया और फिर जैसे सीताजीको धीरज दिया, सो सब कहा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 970 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा।।
English explanation
Having heard the whole account, Hanuman, son of the wind god, proceeded to leap across the vast ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सारी | the whole |
| कथा | बात | account |
| समीरकुमारा | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| नाघत | लाँघने | leaping across |
| भयउ | लगे | proceeded to |
| पयोधि | समुद्र को | the ocean |
| अपारा | अपार | vast |
2 लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा। पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा।।
English explanation
How Hanuman entered Lanka and then reassured Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लंकाँ | लंका में | in Lanka |
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey |
| प्रबेस | प्रवेश | entry |
| जिमि | जिस प्रकार | how |
| कीन्हा | किया | made |
| पुनि | फिर | then |
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| धीरजु | धीरज | reassurance |
| जिमि | जिस प्रकार | how |
| दीन्हा | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 970
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 970, 971
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।