उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ।।
मूल पाठ
सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ।।
देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम।।
स्रोत अभिलेख 7.64 · पुस्तक पृ. 968, 968
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! सुनिये, मैं जिस कारणसे आया था, वह सब कार्य तो यहाँ आते ही पूरा हो गया। फिर आपके दर्शन भी प्राप्त हो गये। आपका परम पवित्र आश्रम देखकर ही मेरा मोह, सन्देह और अनेक प्रकारके भ्रम सब जाते रहे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 968 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ।।
English explanation
Listen, dear one: the purpose for which I came has been fully accomplished; I have obtained the blessing of seeing you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| तात | तात; स्नेहपूर्ण संबोधन | dear one; an affectionate address |
| जेहि | जिस | which |
| कारन | कारण या उद्देश्य से | for the purpose |
| आयउँ | मैं आया | I came |
| सो | वह | that |
| सब | सब; पूरी तरह | all; fully |
| भयउ | पूरा हो गया | was accomplished |
| दरस | दर्शन | the sight of you |
| तव | आपके | your |
| पायउँ | मैंने पाए | I obtained |
2 देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम।।
English explanation
On seeing your supremely holy hermitage, my delusion, doubts, and many misconceptions disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पावन | पवित्र | holy |
| तव | आपका | your |
| आश्रम | आश्रम | hermitage |
| गयउ | दूर हो गया | disappeared |
| मोह | मोह; विवेक को ढकने वाला अज्ञान | delusion |
| संसय | संशय | doubt |
| नाना | अनेक प्रकार के | many kinds of |
| भ्रम | भ्रम; गलत धारणाएँ | misconceptions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 968
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 968, 968
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