उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअब हे तात! आप मुझे श्रीरामजीकी अत्यन्त पवित्र करनेवाली, सदा सुख देनेवाली और दु:खसमूहका नाश करनेवाली कथा आदरसहित सुनाइये। हे प्रभो! मैं बार-बार आपसे यही विनती करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 968 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि।।
सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही।।
स्रोत अभिलेख 7.64 · पुस्तक पृ. 968, 968
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि।।
English explanation
Now, the story of Lord Rama, which is deeply purifying, ever brings joy, and destroys accumulated sorrows—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| श्रीराम | भगवान श्रीराम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| अति | अत्यंत | deeply |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| सदा | सदा | always |
| सुखद | सुख देने वाली | joy-giving |
| दुख | दुखों के | of sorrows |
| पुंज | समूह को | the accumulation |
| नसावनि | नष्ट करने वाली | destroying |
2 सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही।।
English explanation
Dear one, please recount that story to me with reverence. Master, I beseech you again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | with reverence |
| तात | तात; स्नेहपूर्ण संबोधन | dear one |
| सुनावहु | सुनाइए | please recount |
| मोही | मुझे | to me |
| बार | बार | time |
| बार | बार; पुनः | after time; again |
| बिनवउँ | मैं विनती करता हूँ | I beseech |
| प्रभु | हे स्वामी | O master |
| तोही | आपसे | you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 968
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 968, 968
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।