उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहिं सकल मति बिमल मराला। बसहिं निरंतर जे तेहिं ताला।।
मूल पाठ
सुनहिं सकल मति बिमल मराला। बसहिं निरंतर जे तेहिं ताला।।
जब मैं जाइ सो कौतुक देखा। उर उपजा आनंद बिसेषा।।
स्रोत अभिलेख 7.57 · पुस्तक पृ. 962, 962
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब निर्मल बुद्धिवाले हंस, जो सदा उस तालाबपर बसते हैं, उसे सुनते हैं। जब मैंने वहाँ जाकर यह कौतुक (दृश्य) देखा, तब मेरे हृदयमें विशेष आनन्द उत्पन्न हुआ॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 962 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहिं सकल मति बिमल मराला। बसहिं निरंतर जे तेहिं ताला।।
English explanation
All the swans of pure understanding who continually dwell in that lake listen to his singing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| सकल | सभी | all |
| मति | बुद्धि | understanding |
| बिमल | निर्मल | pure |
| मराला | हंस | swans |
| बसहिं | रहते हैं | dwell |
| निरंतर | सदा | continually |
| जे | जो | who |
| तेहिं | उस | that; in that |
| ताला | तालाब में | lake |
2 जब मैं जाइ सो कौतुक देखा। उर उपजा आनंद बिसेषा।।
English explanation
When I went there and saw that wondrous sight, great joy arose in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| मैं | मैंने; वक्ता शिव | I, the speaker Shiva |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सो | वह | that |
| कौतुक | अद्भुत दृश्य | wondrous sight |
| देखा | देखा | saw |
| उर | हृदय में | in the heart |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| आनंद | आनंद | joy |
| बिसेषा | विशेष, बहुत | great; exceptional |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 962
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 962, 962
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