उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सात्त्विक श्रद्धा धेनु सुहाई। जौं हरि कृपाँ हृदयँ बस आई।।
मूल पाठ
सात्त्विक श्रद्धा धेनु सुहाई। जौं हरि कृपाँ हृदयँ बस आई।।
जप तप ब्रत जम नियम अपारा। जे श्रुति कह सुभ धर्म अचारा।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीहरिकी कृपासे यदि सात्त्विकी श्रद्धारूपी सुन्दर गौ हृदयरूपी घरमें आकर बस जाय; असंख्यों जप, तप, व्रत, यम और नियमादि शुभ धर्म और आचार (आचरण), जो श्रुतियोंने कहे हैं,॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1026 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सात्त्विक श्रद्धा धेनु सुहाई। जौं हरि कृपाँ हृदयँ बस आई।।
English explanation
If, through Hari's grace, the lovely cow of pure faith comes to dwell in the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सात्त्विक | सत्त्वगुणयुक्त, निर्मल | pure, characterized by sattva |
| श्रद्धा | श्रद्धा | faith |
| धेनु | गाय | cow |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| जौं | यदि | if |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बस | बसने | to dwell |
| आई | आ गई | came |
2 जप तप ब्रत जम नियम अपारा। जे श्रुति कह सुभ धर्म अचारा।।
English explanation
Repetition of sacred words, austerity, vows, restraints, observances, and the countless wholesome religious practices taught by the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | मंत्रादि का दोहराव | repetition of sacred words |
| तप | तपस्या | austerity |
| ब्रत | व्रत | vows |
| जम | नैतिक संयम | ethical restraints |
| नियम | अनुशासित आचरण | disciplined observances |
| अपारा | असंख्य | countless |
| जे | जो | which |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| कह | बताते हैं | teach |
| सुभ | शुभ | wholesome |
| धर्म | धर्म के | of religious duty |
| अचारा | आचरण | practices |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1026
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।