उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीव हृदयँ तम मोह बिसेषी। ग्रंथि छूट किमि परइ न देखी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजीवके हृदयमें अज्ञानरूपी अन्धकार विशेषरूपसे छा रहा है, इससे गाँठ देख ही नहीं पड़ती, छूटे तो कैसे? जब कभी ईश्वर ऐसा संयोग (जैसा आगे कहा जाता है) उपस्थित कर देते हैं तब भी कदाचित् ही वह (ग्रन्थि) छूट पाती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1026 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जीव हृदयँ तम मोह बिसेषी। ग्रंथि छूट किमि परइ न देखी।।
अस संजोग ईस जब करई। तबहुँ कदाचित सो निरुअरई।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जीव हृदयँ तम मोह बिसेषी। ग्रंथि छूट किमि परइ न देखी।।
English explanation
Dense darkness of delusion fills the soul's heart. How can the knot loosen when it cannot even be seen?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीव | जीव के | of the soul |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| तम | अंधकार | darkness |
| मोह | मोह का | of delusion |
| बिसेषी | बहुत घना | especially dense |
| ग्रंथि | गाँठ | knot |
| छूट | छूटे | be undone |
| किमि | कैसे | how |
| परइ | पड़ती है | comes to be |
| न | नहीं | not |
| देखी | दिखाई | seen |
2 अस संजोग ईस जब करई। तबहुँ कदाचित सो निरुअरई।।
English explanation
When God brings about such circumstances, even then that knot is unraveled only on rare occasions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| संजोग | अनुकूल संयोग | favorable circumstances |
| ईस | ईश्वर | God |
| जब | जब | when |
| करई | बनाते हैं | brings about |
| तबहुँ | तब भी | even then |
| कदाचित | कभी-कभार | occasionally |
| सो | वह गाँठ | that knot |
| निरुअरई | सुलझती है | is unraveled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1026
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।