उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेइ तृन हरित चरै जब गाई। भाव बच्छ सिसु पाइ पेन्हाई।।
मूल पाठ
तेइ तृन हरित चरै जब गाई। भाव बच्छ सिसु पाइ पेन्हाई।।
नोइ निबृत्ति पात्र बिस्वासा। निर्मल मन अहीर निज दासा।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हीं [धर्माचाररूपी] हरे तृणों (घास) को जब वह गौ चरे और आस्तिक भावरूपी छोटे बछड़ेको पाकर वह पेन्हावे। निवृत्ति (सांसारिक विषयोंसे और प्रपञ्चसे हटना) नोई (गौके दूहते समय पिछले पैर बाँधनेकी रस्सी) है, विश्वास [दूध दूहनेका] बरतन है, निर्मल (निष्पाप) मन जो स्वयं अपना दास है (अपने वशमें है), दुहनेवाला अहीर है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1026 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेइ तृन हरित चरै जब गाई। भाव बच्छ सिसु पाइ पेन्हाई।।
English explanation
When the cow of faith grazes on those practices as green grass and receives the young calf of heartfelt devotion, her milk flows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइ | वे ही | those very |
| तृन | घास | grass |
| हरित | हरी | green |
| चरै | चरती है | grazes on |
| जब | जब | when |
| गाई | गाय | cow |
| भाव | हृदय का भक्तिभाव | heartfelt devotion |
| बच्छ | बछड़ा | calf |
| सिसु | नन्हा | young |
| पाइ | पाकर | having received |
| पेन्हाई | दूध उतारती है | lets her milk flow |
2 नोइ निबृत्ति पात्र बिस्वासा। निर्मल मन अहीर निज दासा।।
English explanation
Withdrawal from worldly pursuits is the cow's milking tether, trust is the vessel, and the pure mind is one's servant cowherd.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नोइ | दुहते समय पैर बाँधने की रस्सी | tether used during milking |
| निबृत्ति | सांसारिक प्रवृत्तियों से निवृत्ति | withdrawal from worldly pursuits |
| पात्र | दूध रखने का बर्तन | milk vessel |
| बिस्वासा | विश्वास | trust |
| निर्मल | शुद्ध | pure |
| मन | मन | mind |
| अहीर | ग्वाला | cowherd |
| निज | अपना | one's own |
| दासा | सेवक | servant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1026
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।