उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम धर्ममय पय दुहि भाई। अवटै अनल अकाम बनाई।।
मूल पाठ
परम धर्ममय पय दुहि भाई। अवटै अनल अकाम बनाई।।
तोष मरुत तब छमाँ जुड़ावै। धृति सम जावनु देइ जमावै।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! इस प्रकार (धर्माचारमें प्रवृत्त सात्त्विकी श्रद्धारूपी गौसे भाव, निवृत्ति और वशमें किये हुए निर्मल मनकी सहायतासे) परम धर्ममय दूध दुहकर उसे निष्काम भावरूपी अग्रिपर भलीभाँति औटावे। फिर क्षमा और संतोषरूपी हवासे उसे ठंढा करे और धैर्य तथा शम (मनका निग्रह)-रूपी जामन देकर उसे जमावे॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1027 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परम धर्ममय पय दुहि भाई। अवटै अनल अकाम बनाई।।
English explanation
Dear brother, having milked the supreme milk of righteousness, one boils it over a fire made of desirelessness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | श्रेष्ठतम | supreme |
| धर्ममय | धर्मरूपी | consisting of righteousness |
| पय | दूध | milk |
| दुहि | दुहकर | having milked |
| भाई | हे भाई | dear brother |
| अवटै | उबालता है | boils |
| अनल | आग | fire |
| अकाम | कामनारहितता | desirelessness |
| बनाई | बनाकर | having made |
2 तोष मरुत तब छमाँ जुड़ावै। धृति सम जावनु देइ जमावै।।
English explanation
Then one cools it with the breeze of contentment and forgiveness, and sets it with the curd-starter of fortitude and inner tranquility.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोष | संतोष | contentment |
| मरुत | हवा | breeze |
| तब | फिर | then |
| छमाँ | क्षमा से | with forgiveness |
| जुड़ावै | ठंडा करता है | cools |
| धृति | धैर्य | fortitude |
| सम | मन की शांति | inner tranquility |
| जावनु | दही जमाने का जामन | curd-starter |
| देइ | देकर | adding |
| जमावै | जमाता है | sets into curd |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1027
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।