उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुदिताँ मथैं बिचार मथानी। दम अधार रजु सत्य सुबानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब मुदिता (प्रसन्नता) रूपी कमोरीमें तत्त्वविचाररूपी मथानीसे दम (इन्द्रिय-दमन) के आधारपर (दमरूपी खंभे आदिके सहारे) सत्य और सुन्दर वाणीरूपी रस्सी लगाकर उसे मथे और मथकर तब उसमेंसे निर्मल, सुन्दर और अत्यन्त पवित्र वैराग्यरूपी मक्खन निकाल ले॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1027 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुदिताँ मथैं बिचार मथानी। दम अधार रजु सत्य सुबानी।।
तब मथि काढ़ि लेइ नवनीता। बिमल बिराग सुभग सुपुनीता।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुदिताँ मथैं बिचार मथानी। दम अधार रजु सत्य सुबानी।।
English explanation
With joy one churns using reflection as the churn-stick; sense-restraint is its support, and truthful, wholesome speech its rope.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदिताँ | प्रसन्नता से | with joy |
| मथैं | मथता है | churns |
| बिचार | विवेकपूर्ण विचार | discerning reflection |
| मथानी | मथने की छड़ी | churn-stick |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| अधार | आधार | support |
| रजु | रस्सी | rope |
| सत्य | सत्यपूर्ण | truthful |
| सुबानी | सुंदर वाणी | wholesome speech |
2 तब मथि काढ़ि लेइ नवनीता। बिमल बिराग सुभग सुपुनीता।।
English explanation
Then, by churning, one extracts the butter of stainless, beautiful, supremely pure dispassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | फिर | then |
| मथि | मथकर | having churned |
| काढ़ि | निकालकर | having extracted |
| लेइ | लेता है | takes |
| नवनीता | मक्खन | butter |
| बिमल | निर्मल | stainless |
| बिराग | वैराग्य | dispassion |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सुपुनीता | अत्यंत पवित्र | supremely pure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1027
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।