उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय। बससि सदा हम कहुँ परिपालय।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप सर्वरूप हैं, सबमें व्याप्त हैं और सबके हृदयरूपी घरमें सदा निवास करते हैं; [अत:] आप हमारा परिपालन कीजिये। [राग-द्वेष, अनुकूलता-प्रतिकूलता, जन्म-मृत्यु आदि] द्वन्द्व, विपत्ति और जन्म- मृत्युके जालको काट दीजिये। हे रामजी! आप हमारे हृदयमें बसकर काम और मदका नाश कर दीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 943 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय। बससि सदा हम कहुँ परिपालय।।
द्वंद बिपति भव फंद बिभंजय। ह्रदि बसि राम काम मद गंजय।।
स्रोत अभिलेख 7.34 · पुस्तक पृ. 942, 943
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय। बससि सदा हम कहुँ परिपालय।।
English explanation
You are all, pervade all, and dwell in every heart. You abide there always; protect us.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर्ब | सब कुछ | all; everything |
| सर्बगत | सबमें व्याप्त | all-pervading |
| सर्ब | सबके | of all |
| उरालय | हृदय जिनका निवास है | having the heart as your abode |
| बससि | आप बसते हैं | you dwell |
| सदा | सदा | always |
| हम | हम | us |
| कहुँ | को | to; marking ‘us’ as the object |
| परिपालय | पूर्ण रक्षा कीजिए | protect and preserve |
2 द्वंद बिपति भव फंद बिभंजय। ह्रदि बसि राम काम मद गंजय।।
English explanation
Shatter the opposing conditions of life, calamities, and the snare of worldly existence. O Rama, dwell in the heart and destroy desire and pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वंद | सुख-दुःख आदि विपरीत युग्म | opposites such as pleasure and pain |
| बिपति | विपत्ति; संकट | calamities; distress |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| फंद | फंदा; बंधन | snare; bondage |
| बिभंजय | तोड़ दीजिए | shatter; destroy |
| ह्रदि | हृदय में | in the heart |
| बसि | बसकर | dwelling |
| राम | हे राम | O Rama |
| काम | कामना; वासना | desire; lust |
| मद | अहंकार; मद | pride; arrogance |
| गंजय | दमन कीजिए; नष्ट कीजिए | subdue; destroy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 943
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 942, 943
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।