उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ग्यान निधान अमान मानप्रद। पावन सुजस पुरान बेद बद।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप ज्ञानके भण्डार, [स्वयं] मानरहित और [दूसरोंको] मान देनेवाले हैं। वेद और पुराण आपका पावन सुन्दर यश गाते हैं। आप तत्त्वके जाननेवाले, की हुई सेवाको माननेवाले और अज्ञानका नाश करनेवाले हैं। हे निरञ्जन (मायारहित)! आपके अनेकों (अनन्त) नाम हैं और कोई नाम नहीं है (अर्थात् आप सब नामोंके परे हैं)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 942 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ग्यान निधान अमान मानप्रद। पावन सुजस पुरान बेद बद।।
तग्य कृतग्य अग्यता भंजन। नाम अनेक अनाम निरंजन।।
स्रोत अभिलेख 7.34 · पुस्तक पृ. 942, 943
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ग्यान निधान अमान मानप्रद। पावन सुजस पुरान बेद बद।।
English explanation
You are the treasury of knowledge, free from pride and bestowing honor upon others. The Puranas and Vedas proclaim your sacred glory.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान के | of knowledge |
| निधान | भंडार | treasury |
| अमान | अभिमानरहित | free from pride |
| मानप्रद | सम्मान देने वाले | bestower of honor |
| पावन | पवित्र; पवित्र करने वाला | sacred; purifying |
| सुजस | उत्तम यश | glorious renown |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बद | कहते हैं; वर्णन करते हैं | proclaim; describe |
2 तग्य कृतग्य अग्यता भंजन। नाम अनेक अनाम निरंजन।।
English explanation
You know reality, acknowledge what is done for you, and destroy ignorance. You have many names, yet are not confined to any name and are wholly stainless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तग्य | तत्त्व के ज्ञाता | knower of reality |
| कृतग्य | किए हुए उपकार को मानने वाले | grateful; acknowledging kindness received |
| अग्यता | अज्ञान का | of ignorance |
| भंजन | नाश करने वाले | destroyer |
| नाम | नाम | names |
| अनेक | अनेक | many |
| अनाम | नामरहित; किसी नाम से सीमित नहीं | nameless; not confined to a name |
| निरंजन | कलंक और विकार से रहित | stainless and untainted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 942
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 942, 943
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।