उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब ते सो दुर्लभ सुरराया। राम भगति रत गत मद माया।।
मूल पाठ
सब ते सो दुर्लभ सुरराया। राम भगति रत गत मद माया।।
सो हरिभगति काग किमि पाई। बिस्वनाथ मोहि कहहु बुझाई।।
स्रोत अभिलेख 7.54 · पुस्तक पृ. 959, 960
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन सबमें भी हे देवाधिदेव महादेवजी! वह प्राणी अत्यन्त दुर्लभ है जो मद और मायासे रहित होकर श्रीरामजीकी भक्तिके परायण हो। हे विश्वनाथ! ऐसी दुर्लभ हरिभक्तिको कौआ कैसे पा गया, मुझे समझाकर कहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 960 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब ते सो दुर्लभ सुरराया। राम भगति रत गत मद माया।।
English explanation
O Shiva, lord of the gods, rarer than all these is one devoted to Rama, whose pride and delusion have departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | इन सभी | all these |
| ते | से | than |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| दुर्लभ | दुर्लभ | rare |
| सुरराया | हे देवों के स्वामी शिव | O Shiva, lord of the gods |
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति में | in devotion |
| रत | रत | absorbed |
| गत | जिससे दूर हो गए हैं | from whom have departed |
| मद | अहंकार | pride |
| माया | माया का मोह | delusion arising from maya |
2 सो हरिभगति काग किमि पाई। बिस्वनाथ मोहि कहहु बुझाई।।
English explanation
How did that crow attain such devotion to Hari? O Shiva, lord of the universe, explain it to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह ऐसी | that very |
| हरिभगति | भगवान हरि की भक्ति | devotion to Lord Hari |
| काग | कौए काकभुशुण्डि ने | the crow Kakabhushundi |
| किमि | कैसे | how |
| पाई | प्राप्त की | attained |
| बिस्वनाथ | हे विश्व के स्वामी शिव | O Shiva, lord of the universe |
| मोहि | मुझे | to me |
| कहहु | बताइए | tell |
| बुझाई | समझाकर | by explaining |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 960
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 960
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