उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्ह सहस्त्र महुँ सब सुख खानी। दुर्लभ ब्रह्मलीन बिग्यानी।।
मूल पाठ
तिन्ह सहस्त्र महुँ सब सुख खानी। दुर्लभ ब्रह्मलीन बिग्यानी।।
धर्मसील बिरक्त अरु ग्यानी। जीवनमुक्त ब्रह्मपर प्रानी।।
स्रोत अभिलेख 7.54 · पुस्तक पृ. 959, 960
भावार्थ
मूल पाठ के बादहजारों जीवन्मुक्तोंमें भी सब सुखोंकी खान, ब्रह्ममें लीन विज्ञानवान् पुरुष और भी दुर्लभ है। धर्मात्मा, वैराग्यवान्, ज्ञानी, जीवन्मुक्त और ब्रह्मलीन—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 960 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तिन्ह सहस्त्र महुँ सब सुख खानी। दुर्लभ ब्रह्मलीन बिग्यानी।।
English explanation
Even among thousands of those liberated while living, rare is the realized knower absorbed in Brahman, a repository of every joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन जीवनमुक्तों के | those liberated while living |
| सहस्त्र | हजार | a thousand |
| महुँ | में | among |
| सब | सभी | all |
| सुख | सुखों की | of joys |
| खानी | खान या भंडार | a mine or repository |
| दुर्लभ | दुर्लभ है | is rare |
| ब्रह्मलीन | ब्रह्म में लीन | absorbed in Brahman |
| बिग्यानी | अनुभव से जानने वाला ज्ञानी | a knower through direct realization |
2 धर्मसील बिरक्त अरु ग्यानी। जीवनमुक्त ब्रह्मपर प्रानी।।
English explanation
The righteous, the detached, the knowledgeable, those liberated while living, and beings devoted to Brahman form the comparison continued in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्मसील | धर्म का आचरण करने वाले | the righteous |
| बिरक्त | विरक्त | the detached |
| अरु | और | and |
| ग्यानी | ज्ञानी | the knowledgeable |
| जीवनमुक्त | जीते हुए मुक्त | those liberated while living |
| ब्रह्मपर | ब्रह्मपरायण | devoted to Brahman |
| प्रानी | प्राणी | beings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 960
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 960
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।