उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोटि बिरक्त मध्य श्रुति कहई। सम्यक ग्यान सकृत कोउ लहई।।
मूल पाठ
कोटि बिरक्त मध्य श्रुति कहई। सम्यक ग्यान सकृत कोउ लहई।।
ग्यानवंत कोटिक महँ कोऊ। जीवनमुक्त सकृत जग सोऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.54 · पुस्तक पृ. 959, 960
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रुति कहती है कि करोड़ों विरक्तोंमें कोई एक ही सम्यक् (यथार्थ) ज्ञानको प्राप्त करता है। और करोड़ों ज्ञानियोंमें कोई एक ही जीवन्मुक्त होता है। जगत्में कोई विरला ही ऐसा (जीवन्मुक्त) होगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 960 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोटि बिरक्त मध्य श्रुति कहई। सम्यक ग्यान सकृत कोउ लहई।।
English explanation
The Vedas say that among tens of millions of detached people, only rarely does someone attain true knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | एक करोड़ | ten million |
| बिरक्त | विरक्त लोगों के | detached people |
| मध्य | बीच | among |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| कहई | कहते हैं | say |
| सम्यक | यथार्थ और पूर्ण | true and complete |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| सकृत | विरले ही | only rarely |
| कोउ | कोई | someone |
| लहई | प्राप्त करता है | attains |
2 ग्यानवंत कोटिक महँ कोऊ। जीवनमुक्त सकृत जग सोऊ।।
English explanation
Among tens of millions of people possessing knowledge, only a rare one is liberated while living in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यानवंत | ज्ञानवान लोगों के | people possessing knowledge |
| कोटिक | करोड़ों | tens of millions |
| महँ | में | among |
| कोऊ | कोई एक | some one person |
| जीवनमुक्त | जीते हुए ही मुक्त | liberated while still living |
| सकृत | विरले ही | only rarely |
| जग | संसार में | in the world |
| सोऊ | वही व्यक्ति | that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 960
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 960
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।