उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नर सहस्त्र महँ सुनहु पुरारी। कोउ एक होइ धर्म ब्रतधारी।।
मूल पाठ
नर सहस्त्र महँ सुनहु पुरारी। कोउ एक होइ धर्म ब्रतधारी।।
धर्मसील कोटिक महँ कोई। बिषय बिमुख बिराग रत होई।।
स्रोत अभिलेख 7.54 · पुस्तक पृ. 959, 960
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे त्रिपुरारि! सुनिये, हजारों मनुष्योंमें कोई एक धर्मके व्रतका धारण करनेवाला होता है और करोड़ों धर्मात्माओंमें कोई एक विषयसे विमुख (विषयोंका त्यागी) और वैराग्यपरायण होता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 959 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नर सहस्त्र महँ सुनहु पुरारी। कोउ एक होइ धर्म ब्रतधारी।।
English explanation
AI-drafted meaning: Listen, O Shiva, destroyer of Tripura: among a thousand people, perhaps one observes religious duties and vows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मनुष्य | people |
| सहस्त्र | हजार | a thousand |
| महँ | में | among |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| पुरारी | हे त्रिपुरासुर के शत्रु शिव | O Shiva, destroyer of Tripura |
| कोउ | कोई | some person |
| एक | एक | one |
| होइ | होता है | is |
| धर्म | धर्म का | of religious duty |
| ब्रतधारी | व्रत धारण और पालन करने वाला | an observer of vows |
2 धर्मसील कोटिक महँ कोई। बिषय बिमुख बिराग रत होई।।
English explanation
Among tens of millions of righteous people, perhaps one turns away from sense pleasures and devotes themselves to dispassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्मसील | धर्म का आचरण करने वाले | righteous people |
| कोटिक | करोड़ों | tens of millions |
| महँ | में | among |
| कोई | कोई एक | perhaps one |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों से | from objects of sense enjoyment |
| बिमुख | विमुख | turned away |
| बिराग | वैराग्य में | in dispassion |
| रत | रत | engaged |
| होई | होता है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 959
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 960
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।