उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब कें गृह गृह होहिं पुराना। रामचरित पावन बिधि नाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबके यहाँ घर-घरमें पुराणों और अनेक प्रकारके पवित्र रामचरित्रोंकी कथा होती है। पुरुष और स्त्री सभी श्रीरामचन्द्रजीका गुणगान करते हैं और इस आनन्दमें दिन-रातका बीतना भी नहीं जान पाते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 935 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब कें गृह गृह होहिं पुराना। रामचरित पावन बिधि नाना।।
नर अरु नारि राम गुन गानहिं। करहिं दिवस निसि जात न जानहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.26 · पुस्तक पृ. 935, 935
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब कें गृह गृह होहिं पुराना। रामचरित पावन बिधि नाना।।
English explanation
In every household, the Puranas are recounted, and Rama’s sacred deeds are narrated in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबके | everyone |
| कें | के | of |
| गृह | घर | home |
| गृह | घर में | in each home |
| होहिं | कथन होते हैं | are recounted |
| पुराना | पुराण | the Puranas |
| रामचरित | राम का चरित | Rama’s deeds and life |
| पावन | पवित्र | sacred |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
2 नर अरु नारि राम गुन गानहिं। करहिं दिवस निसि जात न जानहिं।।
English explanation
Men and women sing Rama’s virtues; absorbed in doing so, they do not notice the days and nights passing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | पुरुष | men |
| अरु | और | and |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| राम | राम के | Rama’s |
| गुन | गुण | virtues |
| गानहिं | गाते हैं | sing |
| करहिं | गान करते रहते हैं | keep doing so |
| दिवस | दिन | days |
| निसि | रात | nights |
| जात | बीतते हुए | passing |
| न | नहीं | not |
| जानहिं | जानते हैं | notice |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 935
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 935, 935
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।