उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बूझहिं बैठि राम गुन गाहा। कह हनुमान सुमति अवगाहा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ बैठकर श्रीरामजीके गुणोंकी कथाएँ पूछते हैं और हनुमान्जी अपनी सुन्दर बुद्धिसे उन गुणोंमें गोता लगाकर उनका वर्णन करते हैं। श्रीरामचन्द्रजीके निर्मल गुणोंको सुनकर दोनों भाई अत्यन्त सुख पाते हैं और विनय करके बार-बार कहलवाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 935 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बूझहिं बैठि राम गुन गाहा। कह हनुमान सुमति अवगाहा।।
सुनत बिमल गुन अति सुख पावहिं। बहुरि बहुरि करि बिनय कहावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.26 · पुस्तक पृ. 935, 935
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बूझहिं बैठि राम गुन गाहा। कह हनुमान सुमति अवगाहा।।
English explanation
Seated there, the two brothers ask about accounts of Rama’s virtues; Hanuman, deeply versed in sound wisdom, recounts them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझहिं | पूछते हैं | ask about |
| बैठि | बैठकर | having sat down |
| राम | राम के | Rama’s |
| गुन | गुणों की | virtues |
| गाहा | गाथा | accounts |
| कह | कहते हैं | recounts |
| हनुमान | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| सुमति | श्रेष्ठ बुद्धि में | in sound wisdom |
| अवगाहा | गहरी पैठ रखने वाले | deeply versed |
2 सुनत बिमल गुन अति सुख पावहिं। बहुरि बहुरि करि बिनय कहावहिं।।
English explanation
Hearing Rama’s pure virtues, they experience great joy and repeatedly request Hanuman to recount them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते हुए | hearing |
| बिमल | निर्मल | pure |
| गुन | गुण | virtues |
| अति | बहुत | great |
| सुख | सुख | joy |
| पावहिं | पाते हैं | experience |
| बहुरि | फिर | again |
| बहुरि | फिर | and again |
| करि | करके | making |
| बिनय | विनती | a humble request |
| कहावहिं | सुनाने को कहते हैं | have him recount them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 935
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 935, 935
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।