उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संसय सोक निबिड़ तम भानुहि। दनुज गहन घन दहन कृसानुहि।।
मूल पाठ
संसय सोक निबिड़ तम भानुहि। दनुज गहन घन दहन कृसानुहि।।
जनकसुता समेत रघुबीरहि। कस न भजहु भंजन भव भीरहि।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 939, 939
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंशय और शोकरूपी घने अन्धकारके नाश करनेवाले श्रीरामरूप सूर्यको भजो। राक्षसरूपी घने वनको जलानेवाले श्रीरामरूप अग्रिको भजो। जन्म-मृत्युके भयको नाश करनेवाले श्रीजानकीजीसमेत श्रीरघुवीरको क्यों नहीं भजते?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 939 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संसय सोक निबिड़ तम भानुहि। दनुज गहन घन दहन कृसानुहि।।
English explanation
Worship Rama, the sun dispelling the dense darkness of doubt and grief, and the fire burning the thick forest of demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसय | संदेह | doubt |
| सोक | शोक | grief |
| निबिड़ | घना | dense |
| तम | अंधकार | darkness |
| भानुहि | सूर्य के समान राम को | Rama as the sun |
| दनुज | दानव रूपी | demons likened to |
| गहन | वन | a forest |
| घन | घना | thick |
| दहन | जलाने वाली | burning |
| कृसानुहि | अग्नि के समान राम को | Rama as fire |
2 जनकसुता समेत रघुबीरहि। कस न भजहु भंजन भव भीरहि।।
English explanation
Why do you not worship Rama, the hero of Raghu’s lineage, together with Sita, Janaka’s daughter, who destroys the fear of worldly existence?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| समेत | सहित | together with |
| रघुबीरहि | रघुकुल के वीर राम को | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| भजहु | भजते हो; भक्ति करते हो | do you worship |
| भंजन | नष्ट करने वाले | destroyer of |
| भव | संसार का; जन्म-मरण का | of worldly existence and rebirth |
| भीरहि | भय को हरने वाले राम को | Rama, remover of fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 939
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 939, 939
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।