उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काल कराल ब्याल खगराजहि। नमत राम अकाम ममता जहि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकालरूपी भयानक सर्पके भक्षण करनेवाले श्रीरामरूप गरुडज़ीको भजो। निष्कामभावसे प्रणाम करते ही ममताका नाश कर देनेवाले श्रीरामजीको भजो। लोभ-मोहरूपी हरिनोंके समूहके नाश करनेवाले श्रीरामरूप किरातको भजो। कामदेवरूपी हाथीके लिये सिंहरूप तथा सेवकोंको सुख देनेवाले श्रीरामजीको भजो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 939 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
काल कराल ब्याल खगराजहि। नमत राम अकाम ममता जहि।।
लोभ मोह मृगजूथ किरातहि। मनसिज करि हरि जन सुखदातहि।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 939, 939
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 काल कराल ब्याल खगराजहि। नमत राम अकाम ममता जहि।।
English explanation
Worship Rama, who is like Garuda to the dreadful serpent of death. Bow to Rama, become free of desire, and abandon possessive attachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल; मृत्यु रूपी | death, likened to |
| कराल | भयानक | dreadful |
| ब्याल | सर्प | serpent |
| खगराजहि | पक्षिराज गरुड़ के समान राम को | Rama, like Garuda, king of birds |
| नमत | प्रणाम करते हुए | bowing to |
| राम | राम को | Rama |
| अकाम | कामनारहित होकर | free of desire |
| ममता | मेरापन; आसक्ति | possessive attachment |
| जहि | छोड़ो; त्यागो | abandon |
2 लोभ मोह मृगजूथ किरातहि। मनसिज करि हरि जन सुखदातहि।।
English explanation
Worship Rama, the hunter of the deer-herd of greed and delusion, the lion to the elephant of desire, and the giver of happiness to devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोभ | लालच | greed |
| मोह | मोह; भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion and attachment |
| मृगजूथ | हिरनों का झुंड | a herd of deer |
| किरातहि | शिकारी के समान राम को | Rama as the hunter |
| मनसिज | कामदेव; कामना रूपी | the god of desire, likened to |
| करि | हाथी | an elephant |
| हरि | सिंह | a lion |
| जन | भक्तों को | to devotees |
| सुखदातहि | सुख देने वाले को | the giver of happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 939
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 939, 939
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।