उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बासना मसक हिम रासिहि। सदा एकरस अज अबिनासिहि।।
मूल पाठ
बहु बासना मसक हिम रासिहि। सदा एकरस अज अबिनासिहि।।
मुनि रंजन भंजन महि भारहि। तुलसिदास के प्रभुहि उदारहि।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 939, 939
भावार्थ
मूल पाठ के बादबहुत-सी वासनाओंरूपी मच्छरोंको नाश करनेवाले श्रीरामरूप हिमराशि (बर्फके ढेर) को भजो। नित्य एकरस, अजन्मा और अविनाशी श्रीरघुनाथजीको भजो। मुनियोंको आनन्द देनेवाले, पृथ्वीका भार उतारनेवाले और तुलसीदासके उदार (दयालु) स्वामी श्रीरामजीको भजो॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 939 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहु बासना मसक हिम रासिहि। सदा एकरस अज अबिनासिहि।।
English explanation
Worship Rama, like a mass of frost to the mosquitoes of countless desires, ever unchanging, unborn, and imperishable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बासना | वासनाएँ; अंतर्निहित इच्छाएँ | desires and latent cravings |
| मसक | मच्छर | mosquitoes |
| हिम | हिम; पाला | snow or frost |
| रासिहि | हिम के समूह के समान राम को | Rama as a mass of frost |
| सदा | सदैव | always |
| एकरस | एक समान; अपरिवर्तनशील | unchanging |
| अज | अजन्मा | unborn |
| अबिनासिहि | अविनाशी राम को | the imperishable Rama |
2 मुनि रंजन भंजन महि भारहि। तुलसिदास के प्रभुहि उदारहि।।
English explanation
Worship Rama, who delights the sages, removes the earth’s burden, and is Tulsidas’s generous Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| रंजन | आनंद देने वाले | delighting |
| भंजन | दूर करने वाले | removing |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| भारहि | भार दूर करने वाले राम को | Rama, remover of its burden |
| तुलसिदास | कवि-भक्त तुलसीदास | Tulsidas, the poet-devotee |
| के | के | belonging to |
| प्रभुहि | स्वामी को | the Lord |
| उदारहि | उदार; कृपालु राम को | the generous, gracious Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 939
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 939, 939
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।