उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभु मंत्र मोहि द्विजबर दीन्हा। सुभ उपदेस बिबिध बिधि कीन्हा।।
मूल पाठ
संभु मंत्र मोहि द्विजबर दीन्हा। सुभ उपदेस बिबिध बिधि कीन्हा।।
जपउँ मंत्र सिव मंदिर जाई। हृदयँ दंभ अहमिति अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 7.105 · पुस्तक पृ. 1007, 1008
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन ब्राह्मणश्रेष्ठने मुझको शिवजीका मन्त्र दिया और अनेकों प्रकारके शुभ उपदेश किये। मैं शिवजीके मन्दिरमें जाकर मन्त्र जपता। मेरे हृदयमें दम्भ और अहंकार बढ़ गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संभु मंत्र मोहि द्विजबर दीन्हा। सुभ उपदेस बिबिध बिधि कीन्हा।।
English explanation
That excellent Brahmin gave me Shiva's mantra and offered wholesome instruction in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव का | of Shiva |
| मंत्र | मंत्र | sacred formula |
| मोहि | मुझे | to me |
| द्विजबर | श्रेष्ठ ब्राह्मण ने | the excellent Brahmin |
| दीन्हा | दिया | gave |
| सुभ | कल्याणकारी | wholesome |
| उपदेस | उपदेश | instruction |
| बिबिध | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| कीन्हा | किया | gave |
2 जपउँ मंत्र सिव मंदिर जाई। हृदयँ दंभ अहमिति अधिकाई।।
English explanation
I would go to Shiva's temple and recite the mantra, but my heart was full of pretension and egotism.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपउँ | मैं जपता था | I recited |
| मंत्र | मंत्र | the sacred formula |
| सिव | शिव के | Shiva's |
| मंदिर | मंदिर में | to the temple |
| जाई | जाकर | having gone |
| हृदयँ | हृदय में | in my heart |
| दंभ | दंभ; दिखावटी धार्मिकता | pretension; ostentatious piety |
| अहमिति | अहंकार; मैंपन | egotism; self-importance |
| अधिकाई | बहुत अधिक था | was abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1007, 1008
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।