उत्तरकाण्ड · सोरठा 105 (क) · सोरठा
मैं खल मल संकुल मति नीच जाति बस मोह।
मूल पाठ
मैं खल मल संकुल मति नीच जाति बस मोह।
हरिजन द्विज देखें जरउँ करउँ बिष्नु कर द्रोह॥ १०५ (क)॥
स्रोत अभिलेख 7.105 · पुस्तक पृ. 1007, 1008
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं दुष्ट, नीच जाति और पापमयी मलिन बुद्धिवाला मोहवश श्रीहरिके भक्तों और द्विजोंको देखते ही जल उठता और विष्णुभगवान्से द्रोह करता था॥ १०५ (क)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मैं खल मल संकुल मति नीच जाति बस मोह।
English explanation
AI draft: I was wicked, my mind filled with impurities; I was of low caste and under the sway of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I, the speaker |
| खल | दुष्ट | wicked |
| मल | मन के दोष | mental impurities |
| संकुल | से भरी हुई | filled with |
| मति | बुद्धि | mind or understanding |
| नीच | नीच; जाति का विशेषण | low; qualifying caste |
| जाति | जाति | caste |
| बस | वश में | under the sway of |
| मोह | मोह | delusion |
2हरिजन द्विज देखें जरउँ करउँ बिष्नु कर द्रोह॥ १०५ (क)॥
English explanation
AI draft: Seeing devotees of Hari and Brahmins, I burned with envy and acted with hostility toward Vishnu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिजन | हरि के भक्त | devotees of Hari |
| द्विज | ब्राह्मण | Brahmins |
| देखें | देखने पर | on seeing |
| जरउँ | मैं ईर्ष्या से जलता हूँ | I burn with envy |
| करउँ | मैं करता हूँ | I commit or practice |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| कर | के प्रति | toward |
| द्रोह | द्रोह; वैरभाव | hostility |
| क | पद का संदर्भ-चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 105 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1007, 1008
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।