उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत उदय संतत सुखकारी। बिस्व सुखद जिमि इंदु तमारी।।
मूल पाठ
संत उदय संतत सुखकारी। बिस्व सुखद जिमि इंदु तमारी।।
परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा। पर निंदा सम अघ न गरीसा।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर संतोंका अभ्युदय सदा ही सुखकर होता है, जैसे चन्द्रमा और सूर्यका उदय विश्वभरके लिये सुखदायक है। वेदोंमें अहिंसाको परम धर्म माना है और परनिन्दाके समान भारी पाप नहीं है॥ ११॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1034 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संत उदय संतत सुखकारी। बिस्व सुखद जिमि इंदु तमारी।।
English explanation
The appearance of saints always brings happiness, like the moon and the sun, enemy of darkness, bringing joy to the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों का | of saints |
| उदय | उदय | appearance |
| संतत | सदा | always |
| सुखकारी | सुख देनेवाला | bringing happiness |
| बिस्व | संसार को | to the world |
| सुखद | सुख देनेवाले | bringing joy |
| जिमि | जैसे | like |
| इंदु | चंद्रमा | moon |
| तमारी | अंधकार का शत्रु, सूर्य | sun, enemy of darkness |
2 परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा। पर निंदा सम अघ न गरीसा।।
English explanation
Nonviolence is known in the Vedas as the highest virtue; O king of birds, no sin equals slandering others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | सर्वोच्च | highest |
| धर्म | धर्म | virtue |
| श्रुति | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | प्रसिद्ध | known |
| अहिंसा | हिंसा न करना | nonviolence |
| पर | दूसरों की | of others |
| निंदा | निंदा | slander |
| सम | समान | equal to |
| अघ | पाप | sin |
| न | नहीं | none |
| गरीसा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1034
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।