उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हर गुर निंदक दादुर होई। जन्म सहस्त्र पाव तन सोई।।
मूल पाठ
हर गुर निंदक दादुर होई। जन्म सहस्त्र पाव तन सोई।।
द्विज निंदक बहु नरक भोग करि। जग जनमइ बायस सरीर धरि।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादशंकरजी और गुरुकी निन्दा करनेवाला मनुष्य (अगले जन्ममें) मेढक होता है और वह हजार जन्मतक वही मेढकका शरीर पाता है। ब्राह्मणोंकी निन्दा करनेवाला व्यक्ति बहुत-से नरक भोगकर फिर जगत्में कौएका शरीर धारण करके जन्म लेता है॥ १२॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1034 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हर गुर निंदक दादुर होई। जन्म सहस्त्र पाव तन सोई।।
English explanation
One who slanders Shiva and the guru becomes a frog and receives that body for a thousand births.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव का | of Shiva |
| गुर | गुरु का | of the guru |
| निंदक | निंदा करनेवाला | slanderer |
| दादुर | मेंढक | frog |
| होई | होता है | becomes |
| जन्म | जन्मों तक | births |
| सहस्त्र | हजार | a thousand |
| पाव | पाता है | receives |
| तन | शरीर | body |
| सोई | वही | that same |
2 द्विज निंदक बहु नरक भोग करि। जग जनमइ बायस सरीर धरि।।
English explanation
One who slanders a Brahmin undergoes many hells and is born in the world in a crow’s body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्विज | ब्राह्मण का | of a Brahmin |
| निंदक | निंदा करनेवाला | slanderer |
| बहु | अनेक | many |
| नरक | नरक | hells |
| भोग | भोग | experience |
| करि | करके | having undergone |
| जग | संसार में | in the world |
| जनमइ | जन्म लेता है | is born |
| बायस | कौए का | crow’s |
| सरीर | शरीर | body |
| धरि | धारण करके | assuming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1034
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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