उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी।।
मूल पाठ
संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी।।
काटइ परसु मलय सुनु भाई। निज गुन देइ सुगंध बसाई।।
स्रोत अभिलेख 7.37 · पुस्तक पृ. 945, 945
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंत और असंतोंकी करनी ऐसी है जैसे कुल्हाड़ी और चन्दनका आचरण होता है। हे भाई! सुनो, कुल्हाड़ी चन्दनको काटती है [क्योंकि उसका स्वभाव या काम ही वृक्षोंको काटना है]; किन्तु चन्दन [अपने स्वभाववश] अपना गुण देकर उसे (काटनेवाली कुल्हाड़ीको) सुगन्धसे सुवासित कर देता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 945 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी।।
English explanation
The conduct of saints and the unvirtuous is like the respective behavior of sandalwood and an axe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों | saints |
| असंतन्हि | असंतों | the unvirtuous |
| कै | की | of |
| असि | ऐसी | such |
| करनी | करनी; व्यवहार | conduct; behavior |
| जिमि | जैसे | as; like |
| कुठार | कुल्हाड़ी | axe |
| चंदन | चंदन | sandalwood |
| आचरनी | आचरण; व्यवहार | conduct; behavior |
2 काटइ परसु मलय सुनु भाई। निज गुन देइ सुगंध बसाई।।
English explanation
Listen, brother: the axe cuts sandalwood, but the sandalwood imparts its own quality to the axe, filling it with fragrance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटइ | काटती है | cuts |
| परसु | कुल्हाड़ी | the axe |
| मलय | चंदन को | sandalwood |
| सुनु | सुनो | listen |
| भाई | हे भाई | O brother |
| निज | अपना | its own |
| गुन | गुण | quality |
| देइ | देकर; देता है | imparting; gives |
| सुगंध | सुगंध से | with fragrance |
| बसाई | सुगंधित कर देता है | imbues it with fragrance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 945
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 945
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